शीर्षक - नया मोड़
कविता का दिनांक - १३.०८.०४
ये कविता मैंने ट्रेन में लिखी थी जिस दिन मैं इलाहाबाद से चेन्नई अपने करियर अवं नयी ज़िन्दगी की शुरुवात करने के लिए जा रहा था.
"फिर एक नया मोड़ आएगा.
नया रास्ता फिर दिखायेगा.
नए रिश्ते बनते जायेंगे.
पुराने फिर भूलते जायेंगे."
"नयी नयी बरसात होगी.
पुरानो की बस आस होगी.
सपने नए बुनते जायेंगे.
पुराने अधूरे ही रह जायेंगे."
"नए बोल नयी बोली होगी.
पुरानो की तो बस होली होगी.
"नयी नयी बरसात होगी.
पुरानो की बस आस होगी.
सपने नए बुनते जायेंगे.
पुराने अधूरे ही रह जायेंगे."
"नए बोल नयी बोली होगी.
पुरानो की तो बस होली होगी.
नए जन से सामना होगा.
पुरानो को तो बस यादना होगा."
"नया काम नया गुड सिखाएगा.
पुरानो का अनुभव काम आएगा
फिर नए भी अपने लगेंगे.
उनमे भी नए सपने सजेंगे."
"फिर हमें नया अपना लगेगा.
हर चीज़ में रसना लगेगा.
नए के दुःख, दर्द बन जायेंगे
खुशियों में मिठाई भी खायेंगे."
"फिर जब उनसे लगाव सा होगा
एक डर अलगाव का होगा
फिर डरते हम चलते जायेंगे.
हर ख़ुशी में एक गम पाएंगे."
"कि फिर एक नया मोड़ आएगा.
बाकी सब पीछे छोड़ जाएगा.
जो नए थे पुराने हो जायेंगे
फिर हम अकेले हो जायेंगे."
"क्या ये मोड़ का डर कभी न जाएगा.
उम्र भर यू ही सताएगा.
हमें यही मन संतोष दिलाएगा.
की शायद ये मोड़ पुराने मोड़ पर भी मुडायेगा."
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